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जब जीवन का अवसान हो

Raj vardhan JoshiRaj vardhan Joshi February 26, 2022
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जब..
इस जीवन का अवसान हो
निर्विकल्प समाधि हो ध्यान हो
मुखमंडल पर आभा हो स्वर्णिम
अधरों पर मुस्कान हो
नाद बजे संग डमरू डमडम
भोले के संग प्रस्थान हो
देह शिथिल हो चले भले
मन बुध्दि संपूर्ण संज्ञान हो
जाने क्या विधि का विधान हो
अधर में लटका प्राण हो
मन में व्यापक अज्ञान हो
बस इतना करना हे महाकाल
जब चलने की बेला आये
संग भीड़ न कोई मेला जाये
यही पिण्ड सूख बन विटप जले
विटप निकट श्मशान हो
जब जीवन का अवसान हो
इतना पुनीत महान हो
'राज वर्धन जोशी'

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