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अश्रु और भावों का सजीव संयोजन होगा

Raj vardhan JoshiRaj vardhan Joshi March 17, 2022
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अश्रु और भावों का
सजीव संयोजन होगा
आज फिर मेरे ह्रदय आंगन
पुनीत आयोजन होगा
दृष्टि ने दृश्यों को
आमंत्रित किया है
हृदय ने प्रसंगों को
अभिमंत्रित किया है
अतिथि होंगी
अतीत की कुछ घटनाएं
कुछ शब्द अभिव्यक्ति
कुछ वर्जनाएं
जो त्याज्य थीं
अनपेक्षित थीं
प्रतिकूल थीं
जाने पूर्वनिर्धारित रही अथवा
मेरी भूल थी
आज शूल बन हर रोम
छिद्र चुभ रही
अकस्मात ये कैसी  जलधार
फूट रही
पश्चाताप के अश्रुओं से
धुल जाएगा तन मन
बुध्दि और हृदय का पुनः
नवीन गठबंधन होगा।
'राज वर्धन जोशी'

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