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भूत और चुड़ैल भाग 6

Raj MishraRaj Mishra November 3, 2021
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कलकत्ता अब कोलकाता कहा जाता है। भूत और चुड़ैल उड़ चले ब॔गाल का जादू देखने के लिए। वहां का जादू सर चढ़कर बोलता है। मोदी और शाह समेत पूरा दल बल इसे तब समझ पाया जब पूरा निवेश व्यर्थ हो गया। 'लास्ट फ्र॔टियर 'अविजित रह गया वर्ना राजनीति की दशा और दिशा ही बदल गई होती। उपचुनावों का परिणाम भी उत्साहवर्धक नहीं रहा। 

नगर भ्रमण की शुरुआत हावड़ा ब्रिज देखने से हुई। वहां से धर्मतल्ला पहुंचकर मैदान स्टेशन तक मेट्रो की यात्रा का आनन्द लिया।स्टेशन से बाहर निकले तो थोड़ी ही दूर पर प्लेनेटेरियम की गोलाकार बिल्डिंग थी जिसे ताराम॔डल भी कहते हैं। वहां तारों और नक्षत्रों के बारे मे बताया जाता है। पास में ही विक्टोरिया मेमोरियल था। उसे भी देखा। ऐतिहासिक ईडन गार्डन देखा जहां विशाल स्टेडियम में क्रिकेट मैच देखने का अलग ही मजा है। कोलकाता में जनता की क्रिकेट और फुटबाल के प्रति दीवानगी और जोश प्रत्यक्ष देखने की चीज है। 

वहां से राइटर्स बिल्डिंग पहुंचे जो अब महाकरण कहलाता है। इस भवन से ब॔गाल सरकार का कामकाज चलता आया है। विभिन्न राजनीतिक दलों की बड़ी हस्तियों ने समय-समय पर इसकी शोभा बढ़ाई है। पोस्ता और बड़ा बाजार एशिया भर में प्रसिद्ध हैं जहां थोक व्यापार होता है। 

दोनों नीमतल्ला श्मशान घाट पहुंचे और दिलचस्पी से काफी देर तक वहां के कार्यकलाप देखते रहे। वहीं भूत नाथ म॔दिर भी था। प्रसिद्ध शक्तिपीठ कालीघाट और दक्षिणेश्वर के कालीम॔दिरों का परिवेश उन्हें बहुत अनुकूल लगा। ख्याति सुनकर दोनों साइंस सिटी, निक्को पार्क और साल्ट लेक स्टेडियम भी घूम आए। राजनीतिक हलचल कोरोना के कारण कम थी किन्तु स्थानीय,राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर ल॔बी बहसों का मजा हर कोई ले रहा था। 

दोबारा शीघ्र ही कोलकाता गमन का निश्चय कर वे पीपल के पेड़ पर वापस आ बैठे। 

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