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भूत और चुड़ैल भाग 3

Raj MishraRaj Mishra October 8, 2021
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कानपुर भ्रमण के बाद अगले गंतव्य के बारे में सोचा गया। तय हुआ कि लखनऊ चला जाय। वो बोली कि अम्मा ने कभी बाहर जाने ही नहीं दिया। अब काहे की रोक टोक, चलो बेखटके घूम आएं। वह राजी हो गया। शीघ्र ही लखनऊ पहुंच गए, किन्तु सब बेमजा हो गया। हर तरफ लोगों का हुजूम था। जगह-जगह पुलिस लगी हुई थी। लखीमपुर खीरी की चर्चा जोरों पर थी। वहां हुए कांड को लेकर गर्मागर्म बहसें हो रही थीं।कहीं कहीं धरना प्रदर्शन हो रहा था तो कहीं नेतागण लखीमपुर जाने की तैयारी में जुटे थे। कोई प्रेसवार्ता कर रहा था। वे उकताकर वहां से जल्द ही हट गये।भूलभुलैया,इमामबाडा, गोमती रिवरफ्र॔ट इत्यादि देखने के बाद उन्होंने मेट्रो रेल में भो बेटिकट सफर किया।इस तरह इस विस्मरणीय यात्रा का समापन हुआ।  हमारा भूत और उसकी हमसफर चुड़ैल वापस पीपल पर बैठ गए । अगले टूर की योजना पर विचार होने लगा ।लखनऊ की यात्रा के अनावश्यक तनाव को दोनों ही भुला देना चाहते थे।अबकी बार वे किसी शांतिपूर्ण स्थान पर जाना चाहते थे।उन्होंने अगली यात्रा के लिए पहाड़ पर जाने का कार्यक्रम बनाया।

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