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भूत और चुड़ैल भाग 2

Raj MishraRaj Mishra October 7, 2021
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पीपल पर ठहरे हुए एक कालख॔ड बीत गया।

दोनों ही अब समान दिनचर्या से ऊबने लगे थे।

यह निश्चित किया गया कि इधर-उधर की तफरीह लें।

चलो पहले कानपुर की आकाश मार्ग से यात्रा की जाए।

प्रस्ताव पारित हुआ और दो दीवाने उड़ चले।

आकाश मार्ग से शहर देखने का यह अभिनव प्रयास था।


सबसे पहले रेलवे स्टेशन, घंटाघर और एयरपोर्ट देखा। तत्पश्चात ग॔गा बैराज का विह॔गम दृश्यावलोकन किया।

मेट्रो रेल मार्ग के लिए खुदी, गड्ढा युक्त, मुक्त सड़कें देखीं।

शहर के बाजार, माल वगैरह अब खुलने लगे थे।

कोरोनावायरस का सर्वनाशी प्रभाव कम हो चला था।


अचानक एक दिन प्रेत लीला का कार्यक्रम बना।

उद्देश्य विशुद्ध मनोरंजन था और कुछ नहीं।

किसी को हानि न पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा गया।

पात्र के रूप में भूत प्रेत वाली फिल्मों का दर्शक चुना।

वह लड़का बिस्तर में घुसकर ऐसे सीरियल भी देखता।


घर-परिवार के लोग दौड़कर आए। लड़का आपे में नहीं।

आंय बांय बक रहा था। सभी सन्नाटे में आ गए।

कुछ भी सूझ नहीं रहा था। हर कोई सलाह दे रहा था।

बच्चे की हालत देखकर मां का बुरा हाल था।

वह मां को पहचानने से भी इन्कार कर देता।

थोड़ी देर बाद लगता कि जैसे कुछ हुआ ही न हो।

वो बोली तो वह पसीज गया और लड़का ठीक हो गया।

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