सच और झूठ's image
Share0 Bookmarks 0 Reads0 Likes
सच को हर मोड़ पे हारते देखा,
जूठ करता नंगा नाच ।
स्वाभिमान को टुकड़े टुकड़े होते देखा,
गुलामगिरी पर आती नही कोई आंच ।।
सचा आदमी हर कदम पे पापड़ बेले,
जूठे हर रोज ऐश्वर्य की सीढ़ियों में खेले ।।।
ए राज कहां चला तू सच के रास्ते, 
ये इतना आसान नहीं,
इसके अलावा जूठा होता कहीं परेशान नहीं ।।।।


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts