माँ❤️'s image
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रातों से दिल घबराता है, खामोशी मुझे सताती है,

इस मुलायम बिस्तर पर माँ नींद मुझे नहीं आती है।


तारें सब छुप जाते है, रातें दिन जैसी होती है,

पैसा है खुदा यहाँ, इबादत जिसकी होती है।

भूख होने पर भी रोटी मुझे नहीं भाती है,

तेरे इस लाल को ए माँ नींद नहीं यहाँ आती है।


सत्य और ईमानदारी का पाठ जो तुमने मुझे पढ़ाया है,

कदम-२ पर इस दुनिया ने भ्रम बता झूठलाया है।

बेईमानी मक्कारी के दौर में सच्चाई टिक नहीं पाती है,

थकान से चूर होकर ए माँ नींद मुझे नहीं आती है।


सब मुखौटा पहने हैं, सुख समृद्धि व खुशहाली का,

पग-२ पर देते हैं परीचय, सोच छोटी और काली का।

हर चौराहे पर यहाँ इंसानियत अपनी व्यथा सुनाती है,

इस मखमल बिस्तर पर माँ नींद मुझे नहीं आती है।


Rahul Gahlot

FB (दिल से.): @iamrahulgahlot

Insta: the_defender_of_faith

Twitter: @iamrahulgahlot

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