मेरा रक्षा बंधन's image
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सच कहूं तो! आज मेरा मन बहुत उदास है।
ना कुछ खाने की फिक्र, और ना ही उठने की..

बस सुबह से बिस्तर पर लेटे हुए
गुज़रे पलों को याद कर, आंखें भिगो रहा हूं।
पूरी कलाई भर जाती थी,
 पूरा दिन हाथ भरा हुआ लेकर इधर से उधर सबको दिखाते फिरते 
  और बहनों की लाई मिठाई का स्वाद पूरा दिन रहता ।
कुछ सालों से कलाई सूनी ही रहती थी, 
सच कहूं तो 
अकेलेपन की वजह से कभी बांधा ही नहीं
 या 
 यूं कहें कि उदासी इतनी हो जाती 
  कि बस रोते हुए सो जाता था।
  आज पहली बार मेरी बहन की राखी आई है,
  बहुत खुश हूं लेकिन आंखें सुबह से भीगी भीगी सी हैं।
  होंठ बिलकुल रूखे रूखे से, कुछ अजीब सी भाषा में बुदबुदाते हुए।
  जिसे मन के सिवा कोई नहीं पढ़ सकता। 
  
  आज बहुत ही खास दिन है ना...
  ""रक्षा बंधन का त्यौहार ""
मेरी बहनों के लिए किसी महापर्व से कम नहीं है,
मैं जो लाडला भाई ठहरा।
कई साल हो गए, बहन के हाथ से बंधने वाला रक्षा सूत्र
अपने हाथों से ही बांधना पड़ता है

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