ख़्वाहिशें's image
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आख़िर तादाद कितनी है

कुछ भी ख़बर नहीं

और न ख़्याल आया कभी

कि पता करूँ इनके बारे में

मगर यक़ीनन तय है

इनकी तादाद बेशुमार होगी।

यक़ीनन कह सकता हूं

ये अलग-अलग मज़हब के है

उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर

अलग-अलग रंग रूपों के

अलग-अलग मिज़ाज के

बेबसी से देखते रहते हैं

बिना शिकायत किए

तंग बंद कमरे के झरोखों से

जहां अंधेरे का क़ब्ज़ा है

जहां ये सारे के सारे

एक साथ गुज़र-बसर करते हैं

ऐसा लगता है

ये शह-मात का

खेल खेल रहें हैं

अलग-अलग खानों में खड़े हैं

टकटकी लगाए, मुस्तैद

अपनी-अपनी पारी के इंतजार में

कि कब उनकी पारी आएगी

और वे जीत कर

इस तंग कमरे से बाहर आएंगे

अपनी जीत का जश्न मनाने

इस खुली आब-ओ-हवा में।


© रविन्द्र कुमार भारती

#rabindrakbhartii


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