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वो मासूम आँखें !

R N ShuklaR N Shukla March 31, 2022
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झाड़ियों के  बीच से

चमकतीं ख़ूबसूरत –

दो मासूम-सी आँखें 

मेरीओर ताकती  हैं

वे  मुझे  आँकती हैं 

शायद वे जानती हैं

कि "हम इंसान "–

प्यार  नहीं  करते ,

शिकार  करते हैं –

मजबूरों का –

मजलूमों का !!

और वे छुप जाना चाहती हैं

आख़िर कब तक छुपेगीं?वो

हम ढूंढ ही लेंगे उन्हें मार ही देंगे !

इंसानों के वेश में शिकारी हैं हम !!

सफेदपोश भेड़िये भी –

क्या नहीं हैं हम ?

  

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