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विद्यार्थियों / शिक्षकों के प्रति

R N ShuklaR N Shukla July 9, 2022
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अपनी सफलताओं पर इतरायें नहीं ।
सभी के कार्य आयु-वर्गानुसार आवंटित हैं । अतः अपने हिस्से का कार्य पूरे मनोयोग से करें ।
छात्र का कार्य है –पढ़ना । अध्यापक का कार्य  पढ़ना-पढ़ाना दोनों है ।
दोनों से ही अपेक्षित है –स्वाध्याय करना । प्रमाद ना करना।
शिक्षण-संस्थानों में  शिक्षण-कार्य का न होना जहाँ छात्र/छात्राओं का भविष्य अंधकारमय कर देने वाला है वहीं 
शिक्षकों के लिए – "एकेडमिक डेथ " है।
अतः जो भी , जितना भी समय मिले , शिक्षण-कार्य से विमुख ना हों ।

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