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शिव मेरे आराध्य !

R N ShuklaR N Shukla June 23, 2022
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मैं ' शिव ' की  शिवता में डूबा !
अपने प्रिय की प्रियता में डूबा !

अब ध्यान सिर्फ़ प्रिय का रहता !
वह छवि अनुपम!औ'ज्योतिर्मान !
वह  रहता  हर क्षण  विद्यमान !

वह अंतहीन  अविनाशी है  !
सबके उर–घट का वासी है !
वह   ही  है  मेरा  कृष्ण–राम !
वह   ही  मेरा  शिव ! काशी है !

वह  है  मुझमें औ' मैं उसमें !
वह  मेरा  है  मैं  उसका  हूँ !
यह  ज्ञान सदा हृद में रहता !
मैं शिव की इस , शिव शिवता में
प्रमुदित हो डूबा रहता !

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