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सच्चाई की राह

R N ShuklaR N Shukla October 6, 2022
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' विजयदशमी ' की हार्दिक शुभकामनाएं !

बुराईयों का रंग बेहद चमकीला और चिकना होता है

जैसे – साँप का शरीर ! 

तो क्या हम साँप को अपने जीवन का अंग बना सकते 
हैं ? नहीं । 

तो फिर हम बुराइयों को जीवन का अंग क्यूँ
बना लेते हैं ?

सच्चाई की राह भले ही चिकनी न हो , खुरदुरी ही क्यों न हो अंततः 

सच्चाई हमारे जीवन को चमका देती है। 

हमें जीवन - जीना सीख देती है ।

अतः बुराई से नहीं , सच्चाई से जीवन जीओ ।

निर्द्वंद्व ! अभय रहो !

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