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राजनीतिक भ्रष्टाचार !

R N ShuklaR N Shukla August 3, 2022
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माननीय ,
अति सम्माननियों के घर से –
हो रही करोड़ों नोटों की बरसात !
जनता कौड़ी-कौड़ी को मोहताज !

वोट लिया , जन-मन के 
विश्वासों पर –
कितना चोट किया ?
बस एक सूत्रीय कार्यक्रम –
भर रहे सभी अपने घरबार !
काले नोटों का अंबार !
भ्रष्टाचार  !  भ्रष्टाचार !

जनता का पैसा लूट लिया 
होते भी नहीं हैं शर्मसार !
यह कैसा इनका आचरण–विचार ?
जनतंत्र में जनता का दोहन !
यह कैसा इनका सम्मोहन ?

जन को यह बात, समझनी होगी
इनकी उलटी गिनती, गिननी होगी ।

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