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राजनीति के गलियारे से

R N ShuklaR N Shukla July 6, 2022
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राजनीति के 
गलियारों में
आनंद ही 
आनंद है ,
और –
इस आनंद से 
फैल रही 
भीषण दुर्गंध है।

अब दुर्गंध है तो है 
हमें क्या फर्क पड़ता
हमारे लिए 
दुर्गंध ही सुगन्ध है


देखिए ना –
लोग कितने पस्त हैं !
एक-एक महानुभाव हैं
हर समय हर घड़ी –
रहते कितने मस्त हैं!

कितने बड़े त्यागी हैं !
घर फूंक तमाशा –
देखने के अभ्यासी हैं !

मौज-मस्ती , सैर-सपाटा 
मंचूरियन पनीर - पराठा 
उनको कैसा घाटा !
उनकी तो –
हरदम कटती चांदी !
देश रहें , विदेश रहें 
या –
रहें दिल्ली या रांची !

पैसा है जन का !
जेब है उनकी 
ओ वही पाजी के पाजी 
भले ही लोग खायें तो 
खायें  साग-भाजी !
उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता !



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