राजनीति's image
Share0 Bookmarks 0 Reads0 Likes
राजनीति  रक्तजीवी है
और है, अस्थिजीवी भी
राजनीति सिर्फ सांप ही नहीं है
जो डसती है
वह ऐसी जोंक भी है,जो
चूस लेती है–धीरे-धीरे
शिराओं का रक्त!

शेष नहीं छोड़ती –
अस्थियाँ भी।
वो भी किसी दिन-
पीस दीं जाती हैं–
राजनीति के कुचक्रों की चक्की में।
बना लिए जाते हैं-
अस्थियों के भस्म!
माथे पर लगाती है
और राख पर चढ़ाती है फूल!
लोग-बाग बजाते हैं –तालियाँ!

जीत जाती है– राजनीति!
हार जाता है –आदमी!
बार-बार हारता है
फिर भी–
उसकी ही तरफ भागता है...

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts