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प्रतीक्षा

R N ShuklaR N Shukla April 13, 2022
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प्रयागराज जंक्शन पे

मिली वो एक दिन –

प्रतीक्षालय में  !

मुस्कुराकर पूछा  उसने –

तुम्हें याद है ? 

हम कब और कहाँ मिले थे ?

शायद जले पे नमक छिड़का उसने

मैंने उत्तर दिया- हाँ, भूला नहीं हूँ मैं

हम काशी के कैंट जंक्शन पे–

मिले थे–  प्रतीक्षालय में !

और ,तभी से  प्रतीक्षारत हैं !

कुछ  देर  की  चुप्पी  !

फिर कहाँ और कब मिलेंगे ? 

मैंने भी पूछ लिया !

तपाक से बोल उट्ठी –

चलो चाय पीते हैं ! 

वही  मिलते  हैं  !

जहाँ  मिले  थे  ,

फिर एक गहरी –चुप्पी !

हँस पड़े और– चल पड़े ...मिलने–

जहाँ पहले पहल मिले थे ।

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