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प्रभु-प्रार्थना !

R N ShuklaR N Shukla February 28, 2022
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तेरी भक्ति की दिल में लगी जब लगन

करता रहता हूँ हरदम तुझे ही नमन

साथ तेरा मिला हाथ तेरा मिला

जिंदगी में नया रंग भरने लगा

होश खोता नहीं गम में रोता नहीं

जागतिक बन्धनों में भी रमता नहीं

जिंदगी में बहुत पाप मैंने किये

हे प्रभो! तुमने मुझको लगाया गले

अब मैं करता हूँ, तेरी हीअभ्यर्थना

दे दे अपनी तू भक्ति यही प्रार्थना

मैं अधम से अधम कर्म करता रहा

पाप के आचरण को ही धरता रहा

फिर भी कितना  क्षमावान है  तू प्रभो

इस अधम पापी को कर दिया तू क्षमा

धर्म धरता चलूँ  कर्म करता चलूँ

एक पल भी तू दिल से न होवे जुदा

मेरे दिल मे है बस अब यही कामना

तेरी भक्ति के रंग में ही रमता रहूँ

वासना अब नहीं कुछ मेरे दिल है

अब मैं दुर्भावना छोड़ता चल रहा

जिंदगी में नहीं अब कोई ख़्वाहिशें

तेरी  भक्ति  करूँ  उम्र  कटती रहे।

मेरी   तुमसे   यही  अर्चना  है  प्रभो!

अपने दिलसे कभी ना तू करना जुदा

देदे  देदे  तू  ऐसा  ही आशीर्वचन

आर्तजन हूँ मैँ,है मेरी यही प्रार्थना

आओआओ प्रभोअब लगालो गले

करता   ही   रहूँ   तेरी  आराधना!!

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