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ओ मुसाफ़िर!
ओ मुसाफ़िर!
चल चला चल
हार में भी जीत तेरी
शब्द में संगीत तेरी।

समय की पहचान कर ले
स्वर-सुरों का ध्यान कर ले
गा कोई ऐसी कहानी
आँख में भर आए पानी
ओ मुसाफ़िर चल चला चल...

सुन! कभी थकना नहीं (तुम)
कभी भी रुकना नहीं (तुम)
बाँधते जाना सुरों में–
जागृति के गान सुन्दर!
ओ मुसाफ़िर चल चला चल...

पथ में आयें मुश्किलें गर
तू कभी डरना नहीं, चल
खिल उठेंगे भाव निर्मल
तुम रचो ऐसी कहानी
हँस उठे मरती जवानी
ओ मुसाफ़िर चल चला चल...

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