नई आवाज़ !'s image
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नई आवाज़  बनकर  जब 
मचलकर चल दिए हैं हम !
क़सम से कारवाँ  –
बनता चलेगा ....

मुश्किलों के दौर में , 
तू अधिक मत सोच ! कर 
हौसला भरकर हृदय में 
चल तू अपने कर्म-पथ पर !
देखना –
एक दिन बदलियाँ –
स्याह की छँट जाएँगी !

विषमताओं से समता ही ग्रहण कर
न्याय के औ' सत्य के पथ चल  !
सत्य को धर ! कर्म करता चल  !
"गीता" भी कहती है यही  –
निष्काम हो तू कर्म कर !

तेरी आवाज़ !  बन जाएगी –
एक  दिन  कारवाँ  की !
बदल जाएगी ये दुनिया !
सँवर जाएगी ये दुनिया !!

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