मौन समर्पण's image
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आज उनकी समंदर-सी 
आँखों में प्यार देखा है!
शायद उनका –
बेपनाह,इकरार देखा है!

थरथराते लबों से–
कहते नहीं कुछ वो
उनकी आँखों से झरते–
अश्क़ों का सैलाब!देखा है

आज उनकी समंदर-सी
आखों में प्यार देखा है।

काँपती देह! 
देखकर उनकी–
तड़प उठा हूँ मैं
दूर क्षितिज पर–
धरती-आकाश को, मिलकर          
'दो जिश्म एक जान' होते देखा है।
आज उनकी समंदर-सी 
आंखों में प्यार देखा है!!
उनका समर्पित– 
वो प्यार देखा है।

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