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मैं वो और चाँद

R N ShuklaR N Shukla March 31, 2022
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हम मिले इस तरह  एक हंसी रात में

ना थी उसको खबर मैं भी था बेख़बर

सासें चलती रही  दिल  धड़कते रहे !

चाँद चलता रहा ! रात ढ़लती रही 
 
क्या अजब बात थी,कुछ न बातें हुईं 

"मौन" के वश रहे ,हम पिघलते गए

अश्रु !  झरते रहे  प्यार करते रहे ...



 

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