कोहरा's image
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सुबह से शाम तक, 
सन्ध्या से रात तक
चहुँ दिश कोहरे का 
फैला साम्राज्य है।

न चिड़ियों की चह चह
न झिंगुरों के सुर-ताल 
नर-नारी पशु-पंछी 
सभी का बुरा हाल है

सड़कों पर पी पी न पों पों 
हर तरफ शान्ति ही शान्ति है

देखने में लगता है
सबकुछ सामान्य है, पर
जाने क्यूँ लगता है
भीतर ही भीतर –
कुछ हो रहा असामान्य है।

इसी बीच म्लेच्छ कॅरोना–
भी धीरे-धीरे शहर शहर 
होता हुआ,आ रहा गाँव है

क्या ये नव वर्ष टू जीरो टू टू
की पैनी तीखी धार है? ये कैसी–
कोहरे की मार है?

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