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किसी से कम कहाँ हैं बेटियाँ !

R N ShuklaR N Shukla May 23, 2022
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किसी से कम नहीं हैं –बेटियाँ !
सृष्टि की श्रृंगार ! हैं हमारी बेटियाँ !

तम में सुन्दर विहान हैं बेटियाँ !
उमस भरी  जिंदगी  में –
सुन्दर-सुखद बरसात हैं बेटियाँ !

किसी से कम कहाँ  हैं बेटियाँ ?
घर हो ,समाज हो ,या हो –
कालेज का विस्तृत प्रांगण !
गीत हो संगीत हो 
कोई  भी  चाहे  क्षेत्र हो !
हर क्षेत्र में कीर्तिमान गढ़ती
चल रही हैं  बेटियां !

प्रधान हों , डिप्टी हों , कलक्टर हों –
वकील–न्यायाधीश , ज्ञान-विज्ञान !
चाहे हो कोई भी उच्चपदस्त पद !
अपने फैसलों और प्रतिभा से  –
अचंम्भित कर रही हैं बेटियां ! 

इसीलिए –
कुछ जानवरों को छोड़ –
सबकी प्यारी – दुलारी –
हैं  हमारी बेटियां !!
किसी से कम कहाँ हैं -
हमारी बेटियां !

शांति की विस्तार भी हैं !
सृजन का  संसार भी हैं !
रस की समूची धार भी हैं
धर्म का प्रतिमान भी हैं !
कीर्ति की कृतिमान गढ़ती
बढ़ रही हैं बेटियाँ !

दुष्ट जन की ज्वाल भी हैं
युद्ध में ललकार भी हैं
गति में विजयनाद भी है
स्वातंत्र्य की हुँकार भरती
चल रही हैं बेटियाँ !

सृष्टि का  श्रृंगार ! भी हैं
नित नया निर्माण भी हैं
प्रेम का दीपक जलाती 
चल रही हैं बेटियाँ !



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