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कविता में भाव–चित्र !

R N ShuklaR N Shukla October 6, 2022
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कविता में यदि सार्थक शब्द-विधान है ,तथ्य ,जमीन से जुड़े हैं तो उसमें स्वतः ही सौंदर्य खिल उठता है। कवि-कल्पनाएं मूर्त हो उठती हैं ! यदि उसके साथ भावों के अनुरूप मर्यादित चित्र संलग्न है तो  कविता में निहित भावों की अनुपम अभिव्यक्ति में चार-चाँद लग जाते हैं । 

हिंदी साहित्य में बहुतेरे ऐसे कवि हैं जिन्होंने कविताओं में
बिम्बों , प्रतीकों , शब्द-चित्रों आदि से भाव-सौंदर्य की अद्भुत छटा बिखेर दिया है । 

पद्मश्री विभूषित भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता की कुछ पंक्तियाँ उद्धृत हैं , जिसमें प्रकृति के साथ आत्मीय संबंध सहज संवेद्य है। कल्पना और शब्द चित्रों के समाहार से सुन्दर भाव प्रस्फुटित हो रहे हैं जो देखने योग्य हैं  –

बूंद टपकी एक नभ से
किसी ने झुक कर झरोखे से
कि जैसे हँस दिया हो
हँस रही-सी आँख ने जैसे
किसी को कस दिया हो...
××××××××××××××
बूँद टपकी एक नभ से
ये कि जैसे आँख मिलते ही
झरोखा बंद हो ले
और नूपुर ध्वनि झमक कर 
जिस तरह द्रुत छंद हो ले ...


   

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