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जीवन को अविरल बहने दो...

R N ShuklaR N Shukla April 28, 2022
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जीवन को –

अविरल बहने दो ...

पर , –

बहकने मत दो !

ठहरे जल में –

कीड़े पड़ जाते हैं !

और बहके हुए को –

लक्ष्य कहाँ  ?

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