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इक दूजे को गले लगायें

R N ShuklaR N Shukla March 23, 2022
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पलभर की जिन्दगी है ये

इतना भी ना इतरायें

हमसे जो ख़फा हों अपने

उन्हें मनायें।

जीवन के ये स्वर्णिम क्षण

इतने भी बड़े नहीं हैं–

कल किसने देखा है ?

छोड़ो कल की बातें,आओ–

इक दूजे को गले लगाएं!

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