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हृदय-द्वार तो खोलो !

R N ShuklaR N Shukla July 20, 2022
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दुर्भिक्ष !  बाढ़  !  औ'  सूखा !
गरीब ! किसान ! मजदूर
महाकाल के मुख में –
असमय जाने को मजबूर !
इस  पर कराधान भरपूर  !
यह तेरा है कैसा न्याय ?

हे इंद्रदेव ! 
ये कैसा तेरा – वज्र प्रहार ! 
मुख से छीन लिया आहार ?

इनसे  कौन-सी  हो गई चूक  ?
अब कैसे मिटेगी इनकी भूख ?

आर्तभाव हो आक्रान्तित जन 
तुमसे  प्रश्न  रहे हैं  पूछ  !
उल्लम्बबाहु ! हे  वज्रपाणि !
कुछ तो बोलो –
अपना हृदय द्वार तो खोलो !

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