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दर्द को गीत बनाये बैठा हूँ

R N ShuklaR N Shukla March 11, 2022
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दर्द को गीत बनाये बैठा हूँ,

तेरे दिए जख़्मों को लिए बैठा हूँ ।

जो लम्हे गुजारे थे एक साथ हम,

उन लम्हों को सीने से लगाये बैठा हूँ ।

ना ही कोई शिकवा,ना गिला है मुझे !

खुद ही अपने लबों को  सीये बैठा हूँ !

तू आये  या  चली  जाए , अब

कोई   फर्क   नहीं   पड़ता 

ख़ुद को बेख़ुदी में रमाये  बैठा हूँ ।

जो  आग!  तूने –

लगाई  थी, मेरे  सीने  में

उस  आग में  खुद  को 

जलाये   बैठा   हूँ !

दर्द को गीत बनाये बैठा हूँ ,

तेरी यादों को जीये बैठा हूँ ।



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