छलावा's image
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अजीब मासूम सा चेहरा हुआ है 

न जाने यह आदमी क्यूँ

गूँगा बना, लँगड़ा हुआ है !

न हिलता है  न डुलता है ,

भरे बाजार में ठहरा हुआ है !

बड़े ही प्यार से पूछा जब मैंने 

बता  तो क्या  हुआ  है ?

बहुत मायूस  होकर

कह उठा वह –

हमें अब क्या पता है !

बहुत  कुरेदने  पे 

दर्द  छलका– उसकी जुबाँ से 

कई दिनों से वह, भूखा रहा है !
 


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