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'बार' और हमारे 'ग़म'

R N ShuklaR N Shukla June 16, 2022
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'बार' में बार-बार जाने वाला आदमी
अपने  ही  घर–द्वार में  हार जाता है ।

इसलिए बार में न जमें , घरबार में रमें
भूल जाएंगे सारे ओ ! रंज-ओ-अलम !

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