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अज़ीब है ये ज़िंदगी का सफ़र

R N ShuklaR N Shukla May 4, 2022
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सपने वो बुनते रहते हैं , 

मैं  पूरा करता रहता हूँ !

प्रश्न वो गढ़ते है रहते हैं

मैं उत्तर हो जाया करता हूँ

शायद वो नहीं जानते कि –

स्वयं गढ़े प्रश्नों के जाल में   

मकड़ी की तरह फँसकर

अपना अस्तित्व ही मिटायेंगे

ये सोचकर –

जिलाने के लिए उनको 

हर क्षण मरके भी उद्दम करता हूँ

उनकी ख़ातिर जिंदा रहता हूँ

कर्मों के पुष्प अर्जितकर

उन्हें  अर्पित करता रहता हूँ !

अजीब है  ये  भी    

जिंदगी का सफर....

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