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आतंकवाद की कमर तोड़ !

R N ShuklaR N Shukla July 1, 2022
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हे विश्वजीत ! हे आर्यपुत्र !
अरि का मान मर्दन कर–
बहुत हो चुका देर न कर !
उनके खिलाफ़ अब –
युद्ध ! वरण कर !

तुम हो चिर शान्ति पुरोधा !
आतंक रोधी कुशल योद्धा !

तेरे  हाथों  में   ब्रह्मायुध !
देर न कर अब करो युद्ध !

शतकोटि रुद्रसम मरुतवान !
शत्रु दमन कर –  हरो प्राण ! 

तुम छत्रपति वीरशिवाजी 
शूर वीर राणा के वंशज !

अपने मन के क्लीवभाव की 
घोर निशा को चीर डाल !

कर में धरके अपने कृपाण !
आतंकवाद का सिर उतार !

चहुँओर सुलगते
आतंक-अंग के –
अंगारों को कुचल डाल !
फैलाओ जन-मन में निनाद !
युद्धस्वर भर उनके खिलाफ !
दहल उठें दुश्मन हजार !


मनुष्यता के बढ़ें चरण....फिर
मानवता की कीर्ति विमल फैले
इस जग में !






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