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अपना ही हमसे रूठ गया !

R N ShuklaR N Shukla July 24, 2022
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नहीं होती –
अब सुबह कभी –
आंगन में ! 
हर क्षण रात रहती है
जब से वो घर को 
छोड़  चली  गई !
आंखों में हरदम 
बरसात रहती है ।

बहुत दिल दुखाया था 
घर के लोगों ने उसका
फिर भी वो कुछ नहीं बोली ! 
मन ही मन कुछ गुना उसने 
और मन मारे निकल ही पड़ी 

जाते हुए कुछ भी तो नहीं कहा उसने !
पलटके इक नजर भी नहीं देखा उसने !

उसकी आहों को हम क्यूँ नहीं सुन पाए
उसके मनोभावों को क्यूँ नहीं समझ पाए
जिस गुरुर में थे वो गुरुर टूट गया !
इस नासमझी में –
अपना ही हमसे रूठ गया

शायद अब ओ नहीं आएगी कभी
एक हूक-सी उठती है रह-रहके दिल मे !
क्यों ना जाने से उसे रोक लिया !

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