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आहिस्ता-आहिस्ता चल !

R N ShuklaR N Shukla May 20, 2022
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जिंदगी  की  राह में –
काँटे तो मिलते ही हैं
कोमल फूल भी मिलते हैं !

काँटों  की  परवा  मत कर!
पर , फूलों की परवा तू कर !
मलयज शीतल बयार बन बह !
तूफानों जैसे कभी न चल !
कहीं नाजुक-से पुष्पों की
पंखुड़ियाँ न झर जाएं !

जरा आहिस्ता-आहिस्ता चल
ऐ मेरे अहले दिल !
कहीं कोई सुमन ! पैरों तले ,
दबकर न मर जाये !

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