बाप का गुरूर's image
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हाँ

हाँ…. ज़रूर हूँ मैं

मगरूर हूँ मैं

हाथ कट जाएगा तेरा


बेटी नहीं हूँ सिर्फ़…..

अपने बाप का गुरूर हूँ मैं


अभी भी होश में आजा - 2

दो मीटर


कपड़ा ज़्यादा मंहगा नहीं आता

पहना भी दूँगी मैं

दफ़ना भी दूँगी मैं


मका……दिके

ज्यादा तावली ना समझे स


शरीफ हूँ,

बावली ना समझे स


दूसरी ढबिया न लखा ले

ना त आँख म तकवे बाड़ दूँगी मैं


हाथ न पिछछे राख ले

ना त छातती हाथ गाड दूँगी मैं


रचना :पुष्पेंद्र पाल सिंह


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