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Aalok ShrivastavPoetry1 min read

वार तबस्सुम के मैं सहता रहूँ

PurushottamPurushottam June 18, 2022
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वार तबस्सुम के मैं सहता रहूँ

तू हंँसती रहे मैं तकता रहूंँ 


आँखों ही आँखों में सब कुछ

तू कहती रहे मैं सुनता रहूंँ


बातों जज़्बातों की बारिश में 

संग-संग तेरे मैं भीगता रहूंँ


इश्क़ ही इश्क़ भरी हो ग़ज़ल

जहाँ मतला तू मैं मक़ता रहूंँ

×××

©पुरुषोत्तम

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