सात संदूकों में बंद कोई राज़ हो तुम's image
Aalok ShrivastavPoetry1 min read

सात संदूकों में बंद कोई राज़ हो तुम

PurushottamPurushottam April 28, 2022
Share0 Bookmarks 41 Reads1 Likes

सात संदूकों में बंद कोई राज़ हो तुम

मेरे सर की पगड़ी मेरा ताज हो तुम


जब से तुम ने है जन्म लिया तब से ही

मेरे जीवन का संगीत मेरा साज़ हो तुम


उर से लगाया कभी कंधे पर घुमाया तुम्हें

अपने पापा की परी मेरा नाज़ हो तुम


आई एक रूप में मेरी नन्हीं गुड़िया मगर

कभी बहन कभी मांँ का अंदाज़ हो तुम 


चले जाओगी छोड़ के पिया घर एक दिन 

कल का भरोसा नहीं मेरा आज़ हो तुम

×××

©पुरुषोत्तम


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts