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Aalok ShrivastavPoetry1 min read

लड़का हूंँ ना आँखें भींगो भी नहीं सकता

PurushottamPurushottam September 9, 2022
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लड़का हूंँ ना आँखें भींगो भी नहीं सकता

मेरा दिल टूटा है और रो भी नहीं सकता


घर का बड़ा हूंँ कई जिम्मेदारियांँ हैं मुझपे

आराम से घर में मैं सो भी नहीं सकता

×××

©पुरुषोत्तम


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