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Romantic PoetryPoetry1 min read

जादू तेरे हाथों के मालिश का

PurushottamPurushottam August 28, 2021
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अब वो बराबरी करेगा मेरी दानिश का

पैदाइश है जो किसी के सिफारिश का


मुझे हराना दुश्मनों के बस में कहांँ था

मैं शिकार हुआ दोस्तों के साज़िश का


मेरी दुनिया में गर तुम नहीं हो शामिल

तेरे बिना क्या करूंँगा मैं ख्वाहिश का


कितना चाहता हूंँ तुमको कैसे बताऊंँ

ये प्यार कोई चीज नहीं पैमाईश का


मेरे खिले चेहरे का राज पूछते हैं सब

बता दूंँ जादू तेरे हाथो के मालिश का

×××

©पुरुषोत्तम

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