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बात कुछ उलझी सी

puneet.mewara.udzpuneet.mewara.udz November 30, 2022
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बात कुछ उलझी उलझी सी है, यकीन नहीं खुद पर अब तो,

पता नहीं अपने हुए या अपना बना कर चले गए,

बात कहा शुरू हुई और किस मंज़िल पे आके रुकी,

अब तो एहसासो में ही ज़िंदगी कटेगी लगता है कभी कभी,

या हो शयद ऐसा भी पा ही लेंगे तुमको अभी अभी, 

चाहे मर कर ही ।  

यह बात ही कुछ ऐसी है,

लब्ज़ो में बया ना हो पाएगी,

खामोश रहे अगर थोड़ी देर और तो खुद को भी न फिर संभाल पाएंगे,

कुछ है जो बताना है मुझको,

कुछ है जो दिखाना है मुझको,

पर ऐसा बहुत कुछ है जो समझाना है मुझको।  

कहना है शायद यही की दिल तुम्हारे बिना लगता नहीं,

पर कहने की जो बात असल में है,

वो यह बात नही।  

क्युकी बात ही कुछ उलझी उलझी सी है,

या फिर अब यह सिर्फ एक बात नहीं ....

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