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कुछ बे-हया औरतें

Priyanka SinghPriyanka Singh September 24, 2022
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कुछ बे-हया औरतें

उतरी हैं सड़क पर

अपना चेहरा दिखातीं,

जल्दी ढको उन्हें

कि दिख ना जाए

उनका दर्द और उदासी


कुछ बे-हया औरतें

नहीं रहना चाहती

फूल सी नाजुक,

तोड़ डालो उन्हें 

कि बदल न जाएं

वो शोलों में


कुछ बे-हया औरतें

बोलने लगी हैं,

दबा दो ये आवाज़

इस से पहले कि

इनकी चीखें

कानों को चीर जाएं


कुछ बे-हया औरतें

मांगती हैं अपना हक

वो जीना चाहती हैं,

कुचल दो उन्हें

कि साँस लेने का हक

है सिर्फ मर्द को


कुछ बे-हया औरतें

बनना चाहती हैं इंसान,

मार डालो उन्हें

इस से पहले कि

वो बन जाएं

जानवर से इंसान


~ प्रियंका सिंह

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