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Why do I writePoetry1 min read

कुर्सी बस हिलानी है!

priyamishrapriyamishra November 11, 2021
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लिख लेने दो

सजा लेने दो पत्रिकाओं को

माहौल है चुनाव का 

गिना लेने दो वादों को

फिर पूछ पांच साल कहां होगी! 

तुम देखना क्या-क्या तरकीब नई होगी

कई चौकीदार नज़र आए हैं

सोचो तिजोरी कहाँ खुली होगी? 

लगा रहें हैं जोर

लगा लेने दो

मंदिरों की घंटियाँ भी ठनका लेने दो

ये आइना जरा साफ रखना

चौखट पर लटकानी है

कुंडी मार दरवाजे पर 

जरा बात इन्हें समझानी है

कुर्सी बस हिलानी है 
हाँ
कुर्सी बस हिलानी है!

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