गैऱ जिंदगी's image
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खुले आसमान के नीचे जिंदगी मानो कैद है
उड़ सकते हैं 
पर जंजीर ये बांधने को मुस्तैद हैं

ख्वाहिशों के ख्वाब उमर रहे़ं हैं
रातों की निंदे आंखों में कैद हैं

डरा रही है हकीकत को मजबूरियाँ
जिंदगी भी अब लगने लगी कोई गैऱ है ! 

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