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तेरी जानिब मेरी नज़र

Priyam DubeyPriyam Dubey September 30, 2022
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तेरी जानिब मेरी नज़र ख़ुद-ब-ख़ुद घूम जाए
जब तू निगाहों से जाए, होंठों से मेरे तबस्सुम जाए

ऑंखें मेरी नम रहे जब तेरी ऑंखों में ग़म देखूॅं
तेरे होंठों पर मुस्कान देख मेरा दिल भी झूम जाए

एक तुम्हीं हो जिसके खातिर सब छोड़ दिया मैंने
तू मिल जाए मुझे फिर चाहे ये दुनिया ही गुम जाए

हवा में अपनी तमन्नाओं को घोल देना चाहता हूॅं
सुबह-शाम ये हवा तुम्हें तुम्हारे माथे पर चूम जाए

हाथ तुम भी थाम लो मेरा, मैंने तुमको थाम लिया
ज़िंदगी के हर सफ़र में साथ-साथ हम-तुम जाए

तिरा नाम पाना चाहते हैं ग़ज़ल और शाइरी मेरे
हर बज़्म से तेरी ही ओर तराना औ' तरन्नुम जाए

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