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ख़त में गुलाब

Priyam DubeyPriyam Dubey June 3, 2022
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हर दिन हर पल का इतना हिसाब कौन रखे
बरसों से थकी आंखों में नया ख़्वाब कौन रखे

ज़िक्र कर दूं तेरा तो कुछ ग़म पुराने उभर जाएं
लेकिन अब लबों पर दिल के अज़ाब कौन रखे

तुम ही नहीं हो तो मुझे रोना सिखायेगा कौन
सूख गईं आंखें, इनमें फिर से सैलाब कौन रखे

वो अदाएं आपकी और वो ख़ूबसूरती वहीं
बग़ैर मेरे इस पर दिल का खिताब कौन रखे

यादों की जूगनुओं से ही रोशन है मेरा सफ़र
फिर ख़्वाबों से जलता हुआ आफ़्ताब कौन रखे

आपकी नज़दीकियों में थे लिखे कुछ शायरी
वो नज़दीकियां हीं ना रहीं तो वो किताब कौन रखे

आपकी नज़रों से ज़्यादा है नशीला कुछ यहां क्या
फिर प्यालों में भरके फीकी सी शराब कौन रखे

आपकी यादों से भी मुझको अब दूर जाना होगा
हर रोज़ याद करूं, आदत इतनी ख़राब कौन रखे

अब तो हर हाल में मुस्कुराना सीख लिया मैंने
ज़िंदगी भर के लिए दिल में इज़्तिराब कौन रखे

हर मुसाफ़िर पुछता है मुझसे तबीयत आपका
आपके नाम से हर सवाल का ज़वाब कौन रखे

याद आते हैं ख़त लिखने के अपने वो दिन पुराने
अब तो "प्रियम" के लिए ख़त में गुलाब कौन रखे

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