ख़त में गुलाब's image
Poetry2 min read

ख़त में गुलाब

Priyam DubeyPriyam Dubey June 3, 2022
Share0 Bookmarks 361 Reads1 Likes
हर दिन हर पल का इतना हिसाब कौन रखे
बरसों से थकी आंखों में नया ख़्वाब कौन रखे

ज़िक्र कर दूं तेरा तो कुछ ग़म पुराने उभर जाएं
लेकिन अब लबों पर दिल के अज़ाब कौन रखे

तुम ही नहीं हो तो मुझे रोना सिखायेगा कौन
सूख गईं आंखें, इनमें फिर से सैलाब कौन रखे

वो अदाएं आपकी और वो ख़ूबसूरती वहीं
बग़ैर मेरे इस पर दिल का खिताब कौन रखे

यादों की जूगनुओं से ही रोशन है मेरा सफ़र
फिर ख़्वाबों से जलता हुआ आफ़्ताब कौन रखे

आपकी नज़दीकियों में थे लिखे कुछ शायरी
वो नज़दीकियां हीं ना रहीं तो वो किताब कौन रखे

आपकी नज़रों से ज़्यादा है नशीला कुछ यहां क्या
फिर प्यालों में भरके फीकी सी शराब कौन रखे

आपकी यादों से भी मुझको अब दूर जाना होगा
हर रोज़ याद करूं, आदत इतनी ख़राब कौन रखे

अब तो हर हाल में मुस्कुराना सीख लिया मैंने
ज़िंदगी भर के लिए दिल में इज़्तिराब कौन रखे

हर मुसाफ़िर पुछता है मुझसे तबीयत आपका
आपके नाम से हर सवाल का ज़वाब कौन रखे

याद आते हैं ख़त लिखने के अपने वो दिन पुराने
अब तो "प्रियम" के लिए ख़त में गुलाब कौन रखे

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts