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एक ओर मैं एक ओर तेरे आशिक़ों का काफ़िला
पहले ही रखती दूरियां क़रीब आकर क्या मिला

नहीं मांगता हूं मैं तेरे ख़्वाबों ख्यालों में जगह
तेरे पास जो मेरा दिल है, वो मेरा है, तू वहीं ला

बेरुखी का आलम था कि दिल की हरियाली गई
ना ख़्वाब फिर रंगीं हुआ, ना फूल ही कोई खिला

तुम बढ़ गई आगे कहीं, मैं रह गया पीछे वहीं
सूनापन मिटाता रहा तेरे यादों का एक सिलसिला

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