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एक ग़ज़ल यार के लिए

Priyam DubeyPriyam Dubey May 25, 2022
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सोचा लिखूं इक ग़ज़ल अपने यार के लिए
कुछ तारीफ़ भी लिख दूं एक बार के लिए

मैं सियह आसमां सा, वो चांद तारे हैं मेरे
फिर चाहे जैसे हैं वो इस संसार के लिए

ज़माने भर से गुमशुदा रहने की आदत है
मेरे यार हीं काफ़ी हैं मेरे ऐतबार के लिए

हो कोई मुश्किल, रब को पुकारा ना कभी
कुछ नाम लब पे तैयार हैं पुकार के लिए

है दुआ रब से यहीं कि काश ऐसा हो सके
हो कुछ ऐसे यार हर एक दिलदार के लिए 

कुछ दोस्तों से दूरियां अच्छी नहीं लगती
हैं ये दोस्त जरूरी "प्रियम" बहार के लिए

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