जब तक जिये's image
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क्या कभी किनारे पर खड़े होकर समंदर या किसी नदी को एकटक निहारा है 

या कभी बस, ट्रेन या कार से जाते हुए दूर तक फैले खेतों को देखा है 

ये नहीं तो कम से कम ऊपर की और देखकर आसमान की थाह पाने का प्रयास तो किया ही होगा,


बंद घरों और चहुं ओर इमारतो से घिरे शहरों में रहकर खुद को और खुद से जुड़ी चीज़ो को बहुत बड़ा समझने लगे हैं हम 

हमारे विचार, भावनाएं, ज्ञान, खोज, आविष्कार, रचना, उपलब्धि सब पर कितना गर्व है हमें ,


पर प्रकृति या कहुँ कि ब्रह्मान्ड के अंतहीन विस्तार के आगे नगण्य हैं सब 

चंद तेज लहरें 

हवा की ज़रा-सी तेज गति 

धरती में तनिक कंपन 

और अब तो एक विषाणु भी कुव्वत रखता है.....


इसीलिए सबसे तालमेल बना के रहें 

जब तक जिये, जितना भी जिये, आनंद में रहें !


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