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एक पैग़ाम तुम्हारे नाम

Priya KusumPriya Kusum October 6, 2021
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सिग्नल पर रूल तोड़ने पर भी तुम कई दफा हमें जाने देते हो,

मांगने पर गोल गप्पे का एक्स्ट्रा पानी भी देते हो,

मोलभाव करने पर चीज़े भी सस्ती कर देते हो,

भीड़ होने पर ट्रेन और बस में सीट भी दे देते हो, 

रास्ते में बन्दर हो और हम डर जाए तो हमारे बिना कुछ कहे ही उन्हें भगा भी देते हो,

हाथ में बोझा ज्यादा हो तो हमें परेशान देखकर उसे हल्का भी कर देते हो 

हम पर कविताएं और गज़ले भी लिखते हो, नज़्म और नगमा भी गाते हो 

हम सुन्दर लग रहे हो तो नजरों से तारीफ भी कर देते हो और फिर नजरें झुका भी लेते हो 

सच कहुँ तो अच्छा लगता है तुम्हारा ये स्नेह.. तुम्हारे भीतर भी बहुत प्रेम और दया है..किसी अन्य भाव को अपने ऊपर हावी होने देने की बजाय बस इन्हें ही बाहर आने दो.

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